
ग्रीनलैंड , 19 Jan : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के खिलाफ अब ग्रीनलैंड (Greenland) में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारियों ने राजधानी नुउक में ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के दिए गए बयानों पर नाराजगी जताई और “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है” के नारे लगाए.
ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक (Nuuk) के डाउनटाउन से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया और अमेरिका विरोधी पोस्टर लहराते रहे. अमेरिका के खिलाफ इस प्रदर्शन को अबतक का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन में राजधानी नुउक की लगभग 25 फीसदी जनसंख्या शामिल थी. लोग अपने बच्चों तक को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए. बैनर में लोगों ने यांकी गो होम लिखा रहा. ग्रीनलैंड में अमेरिका को यांकी कहा जाता है.

EU पलटवार की कर रहा तैयारी
अमेरिकी सरकार के द्वारा यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने के बाद अब EU (यूरोपीय संघ) भी पलटवार की तैयारी में है. EU अब अमेरिका के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट को रोकने जा रहा है. यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी.
जिसमें वेबर ने कहा कि ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर अपनाए गए रवैये के चलते अमेरिका के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट को मंजूरी देना फिलहाल संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि EPP (यूरोपियन पीपुल्स पार्टी) व्यापार समझौते के पक्ष में था, लेकिन अब ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के चलते इसे मंजूर करना संभव नहीं है. अमेरिकी उत्पादों पर 0 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल होल्ड पर रहेगा.
ट्रंप ने लगाया 10 फीसदी टैरिफ
उधर ट्रंप ने ग्रीनलैंड मामले पर अमेरिका का साथ नहीं देने पर 8 यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. इन देशों में डेनमार्क, जर्मनी, नॉर्वे, ब्रिटेन, स्वीडन, नीदरलैंड, फ्रांस और फिनलैंड शामिल हैं.
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के तेवर में बिल्कुल भी नरमी नहीं आई है. उन्होंने पोस्ट कर यूरोपीयन देशों को फिर धमकी दी है. ट्रंप ने कहा कि हमने सैकड़ों सालों तक यूरोपीयन देशों को सब्सिडी दी. इसके बदले में हमने उनसे कोई टैक्स नहीं लिया. अब सदियों बाद वक्त आ गया है कि डेनमार्क उसके बदले कुछ हमें लौटाए, क्योंकि अब विश्व शांति दांव पर लगी है.
ट्रंप ने यूरोपीयन देशों को चिढ़ाते हुए कहा कि डेनमार्क ने वहां सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दो डॉग स्लेज रखे हुए है. रूस और चीन ग्रीनलैंड को हर हाल में हासिल करना चाहते हैं और डेनमार्क इसे चाहकर भी नहीं रोक सकता. इसे अमेरिका ही कामयाब तरीके से रोक सकता है.







