
अक्सर हम सोने की आसमान छूती कीमतों को देखकर हैरान रह जाते हैं, लेकिन दुनिया में एक ऐसा पदार्थ भी मौजूद है जिसके सामने सोना ‘कौड़ियों’ के भाव लगता है. हम बात कर रहे हैं ‘कैलिफोर्नियम’ (Californium) की, जिसे दुनिया का सबसे महंगा पदार्थ माना जाता है. इसकी कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका सिर्फ 1 ग्राम खरीदने के लिए आपको लगभग 200 किलो सोना बेचना पड़ सकता है.
साल 19950 में हुई थी खोज
सोने या चांदी की तरह कैलिफोर्नियम खदानों से नहीं निकलता, बल्कि यह पूरी तरह से मानव निर्मित (Man-made) है. यह एक सिंथेटिक और रेडियोएक्टिव तत्व है, जिसकी खोज 1950 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुई थी.
कैसे होता है तायार
बेहद जटिल और खर्चीला है. वैज्ञानिकों द्वारा परमाणु रिएक्टरों के अंदर लंबे समय तक भारी तत्वों को न्यूट्रॉन रेडिएशन के संपर्क में रखकर इसे तैयार किया जाता है. यह प्रक्रिया इतनी धीमी और कठिन है कि पूरी दुनिया में इसे बनाने की क्षमता केवल कुछ ही देशों के पास है और इसका उत्पादन माइक्रोग्राम में होता है.
क्यों है इतनी ज्यादा कीमत? (Californium Price)
इसकी कीमत की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1 ग्राम कैलिफोर्नियम का दाम करीब 27 मिलियन डॉलर (लगभग 244 करोड़ रुपये) है. इसकी इतनी ज्यादा कीमत इसकी वैज्ञानिक उपयोगिता के कारण है. इसका इस्तेमाल न्यूक्लियर रिएक्टर को स्टार्ट करने के लिए ‘न्यूट्रॉन सोर्स’ के रूप में और मेडिकल साइंस में कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के इलाज (न्यूट्रॉन थेरेपी) में किया जाता है.
‘दुर्लभता’ और ‘उपयोगिता’ असली खजाना (Californium vs Gold)
कैलिफोर्नियम की यह अकल्पनीय कीमत यह साबित करती है कि विज्ञान की दुनिया में ‘दुर्लभता’ और ‘उपयोगिता’ ही असली खजाना है. भले ही सोना आम आदमी के लिए सबसे कीमती धातु हो, लेकिन इंसानी दिमाग द्वारा लैब में तैयार किया गया यह तत्व बताता है कि ज्ञान और तकनीक की कीमत किसी भी प्राकृतिक संपत्ति से कहीं ज्यादा हो सकती है.





