
दिल्ली , 19 Nov : सुप्रीम कोर्ट दिल्ली एनसीआर वायु प्रदूषण (Delhi NCR air pollution) मामले में अब हर महीने सुनवाई करने का फैसला किया है. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपाय करना होगा.
जितनी ज्यादा तकनीक, उतना कम उत्सर्जन
सीजेआई गवई ने कहा कि हम आदेश देते हैं की सुप्रीम कोर्ट मासिक आधार पर प्रदूषण की स्थिति की निगरानी करेगा. कोर्ट ने मजदूरों के निर्वाह भत्ते को लेकर दिल्ली एनसीआर राज्यों से निर्देश लेकर अगले दिन अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 10 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
वहीं वाहनों की उम्र को लेकर सीजेआई ने कहा कि कल मैंने एक लेख पढ़ा था कि उत्सर्जन का संबंध वर्षो की संख्या से नहीं, बल्कि किलोमीटर चलने से है. उन्होंने कहा कि जितनी ज्यादा तकनीक होगी, उत्सर्जन उतना ही कम होगा.
सुरक्षित महीनों में हो प्रतियोगिता: कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि स्कूल नवंबर-दिसंबर में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कर रहे हैं, जो कि व्यस्त समय होता है और यह बच्चों को गैस चेम्बर में डालने जैसे है.
इसपर सीजेआई गवई ने CQQM से कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार करें और ऐसी खेल प्रतियोगिताओं को सुरक्षित महीनों में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है. इससे पहले एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया था कि यह एक बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा कि अपलोड किया जा रहा डेटा गलत है.
क्या हैं AQI मॉनिटरिंग स्टेशन की स्थिति?
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एयर मैनेजमेंट कमीशन से प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोकने के लिए उठाए गए कदमों से संबंधित जानकारी मांगी थी. कोर्ट ने पूछा था कि फिलहाल कौन-कौन से एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन कार्यरत हैं और उनकी स्थिति क्या है. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया था कि दीवाली के दौरान दिल्ली के कई एयर व्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन काम नहीं कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि 37 में से सिर्फ नौ स्टेशन ही लगातार सक्रिय थे. उन्होंने कहा कि अगर मॉनिटरिंग स्टेशन सही तरह से काम नही करेंगे, तो यह तय करना मुश्किल होगा कि कब ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप लागू करना है. कोर्ट ने कहा था कि आयोग को स्पष्ट करना होगा कि अगर प्रदूषण गंभीर स्तर पर न पहुचे इसको लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.





